Sri Banke Bihari ke sawaiya, 28 of 144

२८. बैठी हती गुरु लोगन में मन ते मनमोहन को न विसारति। त्यों नन्दलाल जू आय गये बन ते सिर मोरन पंख संवारत॥ लाज ते पीठ दै बैठि बहू, पति मातु की आंख ते आंखिन टारति। सासु की नैंन की पूतरी में निज प्रीतम को प्रतिबिम्ब निहारति॥ This sawaiya verse

12 April, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 27 of 144

छाई कछू हरू आई शरीर में नीर में आई कछू गरुआई। नागरी की नित की जो सधी साई गागरी आज उठ न उठाई॥

09 April, 2010

Sri Banke Bihari ke sawaiya, 26 of 144

In this sawaiya verse by Braj poet Padmakar, a Gopi is asking a tattoo-maker to tattoo several of Krishna’s names on her body, to remember Him better.

09 April, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 25 of 144

२५. तेरी न चेरी न तेरे ददा की, न कोल्हूं में डारि पेराइ देवै हों। खैचत हौ अंचरा गहि कै, फटि हे चुनरी कमरी दे के जै हों॥ टूटेंगे हार हमेल हजार  तौ नन्द जसोदा समेत बिकै हों। राजी चहौ दधि खाओ भला वरि आई लला एक बूंद न पैहों॥

07 April, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 24 of 144

आननचन्द सु मन्द हंसी ‘रतनाकर’ माल हिये लहरावत । देखि सखी वह मैन लजावत सांवरो बेनु बजावत आवत ॥ Krishna in Vrindavan :-)

06 April, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 23 of 144

When Radha was annoyed with Krishna, Krishna bowed at her feet requesting her for truce. He didn’t really know how to please her. Neither did Radha really know how to show anger, observes the poet.

04 April, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 22 of 144

दीन दयाल सुने जब ते, तब ते मन में कछु ऐसी बसी है । तेरो कहाय के जाऊँ कहाँ, तुम्हरे हित की कटि फेंट कसी है ॥ In this sawaiya verse, Malook says to Krishna: Ever since I’ve heard of your merciful nature, I have surrendered myself to you. Now that

03 April, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya 21 of 144

२१. सावन तीज सुहावन कों सखि, सोहैं दुकूल सवै सुख साधा । देखे बनैं कहते न बनैं, उमगै उर में अनुराग अबाधा ॥ प्रेम के हेम हिंडोरन में, सरसै बरसै रस रंग अगाधा । राधिका के हिय झूलत साँवरो, साँवरे के हिय झूलति राधा ॥ This sawaiya

02 April, 2010

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 18 of 144

१८. राधिका कान्ह को ध्यान धरैं, तब कान्ह ह्वै राधिका के गुण गावैं । त्यों अँसुवा बरसैं बरसाने को पाती लिखैं लिखि राधे को ध्यावैं ॥ राधे ह्वै जायँ घरीक में ‘देव’ सु प्रेम की पाती लै छाती लगावैं । आपने आप ही में उरझैं सुरझैं , उरझैं,

21 October, 2009

Sri Banke Bihari ji ke sawaiya, 16 of 144

Krishna playing flute in Vrindavan, Venugeet

This sawaiya verse says: Krishna is very naughty.… He sends the music of his flute as a messenger to places wherever even the breeze has no access!

09 October, 2009



Art of Living Advanced meditation course at Vrindavan, 1-4 April, 2010